रोप के देश स्वीडन का जिक्र हो तो आपके ज़हन में क्या कुछ आता है?
अल्फ्रेड नोबेले, नोबेल पुरस्कार, डायनामाइट, बोफोर्स, कंप्यूटर माउस, फुटबॉल टीम या फिर म्यूजिकल बैंड एबा?
आपके
दिमाग में इस देश की चाहे जो पहचान दर्ज़ हो, वहां के लोग तो अर्से से
अपने समाज के खुलेपन, लैंगिक समानता और राजनीति के उदार चरित्र पर इतराते
रहे हैं.हां सरकारें लोगों की ज़िंदगी में झांकती नहीं बल्कि समाज कल्याण, स्वास्थ्य सुविधाओं और पारदर्शिता तय करने में जुटी दिखती हैं.
हथियार निर्यात करने के मामले में आला देशों की कतार में होने के बाद भी स्वीडन ने साल 1814 के बाद कोई जंग नहीं लड़ी है.
बिशप फ़्रैंको मुलक्कल जालंधर के सेक्रेड हार्ट कैथोलिक चर्च में रहते हैं और ये उनका धार्मिक अधिकार क्षेत्र भी है.
बीबीसी से ख़ास बातचीत में बिशप मुलक्कल ने दावा किया कि उनके ख़िलाफ़ लगे सभी आरोप झूठे हैं.
उन्होंने
कहा, "मेरे ख़िलाफ़ जो आरोप हैं, वो सिर्फ़ झूठी कहानियाँ हैं. उनमें कोई
सच्चाई नहीं है. शिकायतकर्ता एक वयस्क महिला है. ऐसा कैसे हो सकता है कि एक
महिला के साथ कोई इतनी बार और इतने लंबे समय तक लगातार रेप करे."
जबकि
केरल में पुलिस को जो शिकायत मिली है उसमें नन ने ये दावा किया है कि मई
2014 से लेकर सितंबर 2016 के बीच बिशप फ़्रैंको मुलक्कल ने कई बार उनका यौन शोषण किया.
किसी भी चर्च के धार्मिक अधिकार क्षेत्र में एक बिशप सबसे बड़ा पदाधिकारी होता है. भारत में इस वक़्त कुल 145 बिशप हैं.
इस
मामले में जालंधर के बिशप का ये भी दावा है कि नन के ख़िलाफ़ एक अलग
शिकायत में उन्होंने जाँच की थी जिसके बाद नन पर कार्रवाई भी हुई थी. उसी
का बदला लेने के लिए वो ऐसा कर रही है.
इस बीच, केरल में नन महिलाओं
के एक समूह ने इस मामले पर पुलिस की निष्क्रियता के ख़िलाफ़ सार्वजनिक
विरोध प्रदर्शन आयोजित किये हैं. वहीं दूसरी ओर, जालंधर स्थित संस्था
मिशनरी ऑफ़ जीसस ने कोच्चि में सभी ननों से इन विरोध प्रदर्शनों में शामिल न
होने का आग्रह किया है.
केरल में हुए विरोध प्रदर्शनों में कैथोलिक लैटिन चर्च के सदस्यों समेत कई स्थानीय लोगों ने भी हिस्सा लिया.
शिकायतकर्ता का कहना है कि 28 जून 2018 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराने
से पहले उन्होंने चर्च के बड़े अधिकारियों से बिशप फ़्रैंको मुलक्कल के
ख़िलाफ़ बलात्कार के आरोपों की चर्चा की थी, लेकिन नन का आरोप है कि किसी
ने उनकी नहीं सुनी.
शिकायतकर्ता नन का कहना है कि सार्वजनिक तौर पर
विरोध प्रदर्शन करने से पहले उन्होंने जनवरी, जून और सितंबर में दिल्ली में
बैठने वाले पोप के प्रतिनिधियों को भी चिट्ठी लिखी थी.
केरल कैथोलिक
चर्च सुधार आंदोलन के जॉर्ज जोसेफ़ ने इस मामले में पुलिस की निष्क्रियता
के ख़िलाफ़ केरल के उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी.
जब जोसेफ़ की याचिका पर कोर्ट में 10 अगस्त को सुनवाई हुई तब पुलिस ने
कोर्ट को बताया था कि उसे नन के आरोपों के पक्ष में कुछ सबूत मिले हैं,
जिसके बाद कोर्ट ने पुलिस को इस मामले में सावधानी से काम करने को कहा था.
जॉर्ज जोसेफ़ ने चार प्राथमिक बिंदुओं पर अदालत से निर्देश देने की प्रार्थना की है.
बीबीसी से बातचीत में जॉर्ज जोसेफ़ ने कहा, "हम चाहते हैं कि बिशप को
जल्द से जल्द गिरफ़्तार किया जाये. इस मामले की पुलिस जाँच हाई कोर्ट की
निगरानी में हो. बिशप फ़्रैंको मुलक्कल के विदेश यात्रा करने पर प्रतिबंध
लगे और यौन दुर्व्यवहार के पीड़ितों के लिए गवाह सुरक्षा प्रोटोकॉल तैयार
किया जाये."
वहीं अपने बचाव में बिशप फ़्रैंको मुलक्कल कहते हैं कि
नन का पारिवारिक जीवन काफ़ी पेचीदा रहा है. वो एक पुरुष के साथ रिलेशन में
थीं जो अब भी उनका पति है. इस मामले की जाँच की जा रही थी. लेकिन पूछताछ से
ध्यान भटकाने के लिए नन ने उनके ख़िलाफ़ आधारहीन आरोप लगा दिये.
कोच्चि में हुए एक विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाली सिस्टर अनुपमा
इसका जवाब देती हैं. उनका कहना है, "यहाँ उल्टा पीड़िता के ख़िलाफ़ ही
बेबुनियाद आरोप गढ़े जा रहे हैं. जब महिला ने अपना घर छोड़ दिया था तो उनका
परिवार साथ कैसे हो सकता है. बिशप ने ही इस जोड़े पर दबाव बनाकर दोनों से
एक पत्र पर हस्ताक्षर कराये थे."
इस बीच बिशप के ख़िलाफ़ हो रहे विरोध प्रदर्शनों को समाज के अन्य वर्गों का भी समर्थन प्राप्त हो रहा है.
इनके समर्थन में प्रदर्शन में शामिल केरल हाईकोर्ट के सेवानिवृत जज कमाल
पाशा ने बीबीसी से कहा, "पुलिस को अब तक अभियुक्त को हिरासत में लेना
चाहिए. हाईकोर्ट के सामने जाँच अधिकारी ने जो एफ़िडेविट दाख़िल किया है,
उसके मुताबिक़ बिशप को हिरासत में लेने के लिए पर्याप्त सबूत हैं."
"मुझे
लगता है कि इस मामले में नन का साथ देना चाहिए. वे लोग अभियुक्त को बचाने
की कोशिश कर रहे हैं. उसने अभी तक अग्रिम ज़मानत की याचिका भी दाख़िल नहीं
की है."
पेशे से वकील और चर्च सुधार आंदोलन की सदस्य इंदुलेखा जोसेफ़
कहती हैं, "समस्या ये है कि ना तो सरकार और विपक्ष, दोनों में से कोई भी
इस मुद्दे पर बोल नहीं रहा है क्योंकि सबको वोट बैंक की राजनीति करनी है.
लोगों को लगता है कि बिशप का मतदाताओं पर प्रभाव है."
सायरो मालाबार
चर्च के पूर्व प्रवक्ता फ़ादर पॉल थेलाकाठ ने बताया है, "शर्मनाक चुप्पी
है, नन की शिकायत को कई महीने बीत चुके हैं. उन्होंने पुलिस के पास भी
शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई."
फ़ादर थेलाकाठ ने बताया, "कोई फ़ैसला नहीं सुना रहा है कि कौन सही है और कौन ग़लत. लेकिन चुप्पी पीड़ादायक है."
गुजरात के वडोदरा में गोल-गप्पे पर
बैन लगाने की चर्चा सब जगह है. वडोदरा नगर निगम के ट्विटर हैंडल से हुए एक
ट्वीट से इसकी शुरुआत हुई.
ट्वीट में उन्होंने लिखा है - "वडोदरा
फ़ूड डिपार्टमेंट ने 50 पानीपूरी बनाए जाने वाली जगहों पर सरप्राइज़ चेकिंग
की. 4000 किलो पानी-पूरी, 3350 किलो आलू और चना और 1200 लीटर पानी-पूरी का
पानी ज़ब्त कर फेंका. शहर में दस्त और उल्टियों के मामलों की बढ़ती संख्या
को देखते हुए नगर निगम ने फ़ैसला लिया है कि इसकी बिक्री पर रोक लगाई
जाए." ज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक़, जुलाई के महीने में वडोदरा में 120
लोगों को दस्त और उल्टी की शिकायत की बात सामने आई थी. इसके बाद प्रशासन ने
ये कदम उठाया.
मामला कितना गंभीर है, इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया
जा सकता है कि हालात का जायज़ा लेने के लिए दिल्ली से नेशनल सेंटर फ़ॉर
डिज़ीज़ कंट्रोल के दो सदस्य, जांच के लिए वडोदरा पहुंच गए. पिछले पांच
दिनों से वो इलाके में सर्वे कर रहे हैं.
वडोदरा नगर निगम के इस ट्वीट के बाद गुजरातियों की तरफ़ से इस फ़ैसले पर तीखी प्रतिक्रिया आने लगी.
लेकिन वीएमसी के ऐलान के बाद कुछ लोगों ने ट्विटर पर लिखा "सरकार ने
जितनी तत्परता इस स्ट्रीट फ़ूड को बंद करने में दिखाई, काश उतनी तत्परता
समस्या के समाधान में भी दिखाई होती."
कुछ लोगों ने इसे स्ट्रीट फ़ूड वालों के साथ अन्याय बताया है.
तो कुछ लोगों ने कहा कि नगर निगम वालों के इस फ़ैसले से ब्रांडेड पानी-पूरी बेचने वालों का फ़ायदा होगा.
इसके
बाद वीएमसी के हेल्थ ऑफिसर डॉ मुकेश वैद्य ने बीबीसी को बताया, "वीएमसी ने
ऐसी कई जगहों पर कार्रवाई की है जहां गंदे तरीक़े से तैयार की गई
पानी-पूरी बिक रही थी. पानी-पूरी बेचने पर बैन नहीं है, लेकिन पानी-पूरी
गंदे तरीक़े से बनाते और बेचते पाए गए तो उन दुकानदारों और स्ट्रीट फ़ूड
वालों पर सख़्त कार्रवाई होगी."
जितनी मुंह उतनी बातें सामने आई. लेकिन क्या वाक़ई में गोल-गप्पे सेहत के लिए इतना ज़्यादा ख़तरनाक होता है?
इस
सवाल के जवाब में डायटिशियन शालिनी सिंघल कहती हैं, "हमारे देश में लोगों
का ये सबसे ज़्यादा पसंदीदा स्ट्रीट फ़ूड है. गोल-गप्पे खाने में कोई
दिक्क़त नहीं है. गंदे तरीक़े से बनाए गए उसके पानी से तबियत ज़रूर बिगड़
सकती है. घर पर बनाकर इसे खाया जाए तो ये नुकसानदायक नहीं है. रोज़-रोज़ न
खाए, कभी-कभार स्नैक्स के तौर पर इसका इस्तेमाल करें तो कोई दिक्क़त नहीं है."
दिल्ली में रहने वाली अपर्णा, डायटिशियन शालिनी की बात से पूरी तरह सहमत नहीं दिखती.
उनके
मुताबिक, "गोल-गप्पे खाने का मज़ा तो गली-नुक्कड़ में लगे फुलकी वालों के
यहां ही है. घर पर बनाए खाने में वो बात नहीं है. लेकिन इसका मतलब ये नहीं
की पानी ढका न हो, गोल-गप्पे प्लास्टिक से ढके न हों. इतना मैं ज़रूर देख
लेती हूं. वडोदरा नगर निगम को बैन के बजाए इस बात पर ध्यान देना चाहिए था. "
गुजरात मे गोल-गप्पे की बिक्री के तीन तरीक़े हैं. इस धंधे में कुछ छोटे व्यापारी हैं तो कुछ ब्रांडेड नाम भी शामिल हैं.
ब्रांडेड
गोल-गप्पे बनाने वालों को इस धंधे पर सलाह देने वाले संजय चक्रवर्ती कहते
हैं, "कुछ लोग गोल-गप्पे घर में बनाते हैं और पानी भी घर पर बनाते हैं.
गुजरात के वडोदरा शहर में ऐसे व्यापारियों की संख्या ज़्यादा है. ऐसे लोग
इस धंधे में 75 फ़ीसदी लागत से ज़्यादा कमाते हैं. लेकिन कुछ व्यापारी
गोल-गप्पे बाहर से ख़रीदते हैं और पानी घर पर बनाते हैं. ऐसे व्यापारियों
को इस धंधे में 50 फ़ीसदी का फ़ायदा होता है."
दिल्ली में
गोल-गप्पों को ब्रांडेड नाम से बेचने वाले एक व्यापारी गिरिश ने बीबीसी को
बताया, "हम किसी एक खाने के प्रोडक्ट पर फ़ायदा-नुक़सान नहीं जोड़ते. खाने
की दुकान है, लोगों के टेस्ट के हिसाब से सब कुछ रखना पड़ता है. गोल-गप्पे
भी उसी का हिस्सा है. हम तो इस बात का विशेष ख्याल रखते हैं कि हमारे यहां
हर खाने में इस्तेमाल होने वाली हर चीज़ सेहतमंद हो. फिर चाहे वो गोल-गप्पे
का पानी ही क्यों न हो."
वैसे गोल-गप्पे को अलग-अलग नाम से पूरे देश
में जाना जाता है. बंगाल में फुचका, गुजरात और महाराष्ट्र में कई जगह
पानी-पूरी, मध्य प्रदेश में पानी बताशा, उत्तर प्रदेश में फुलकी, बिहार में
गुपचुप, महाराष्ट्र में कई जगह इस बटाटा-पूरी के नाम से जाना जाता है.
डॉ. शालिनी के मुताबिक़ तीन गोल-गप्पे में एक रोटी जितनी कैलरी होती है,
लगभग 70 कैलरी सूजी से बने और आटे से बने गोलगप्पे में कैलरी का बहुत
ज्यादा अंतर नहीं होता.
इसका फ़ायदा कुछ नहीं होता सिवाय इसके कि 2-4 गोल-गप्पे में आपका पेट भर जाता है. लोग टेस्ट बड बदलने के लिए भी गोल-गप्पे खाते हैं.
डॉ. शालिनी के मुताबिक़, अमूमन सुबह-सुबह इसे कोई नहीं खाता. दोपहर या
फिर शाम को हल्के स्नैक के तौर पर इसका इस्तेमाल करने में कोई बुराई नहीं
है. समोसा और कचौड़ी के मुक़ाबले ये ज़्यादा सेहतमंद स्नैक है.
तो
फिर नुकसानदायक कैसे? इस पर डॉक्टर का कहना है कि गोल-गप्पे में नमक का
इस्तेमाल ज़्यादा होता है. इसलिए दिल की बीमारी, एडिमा (जिनके शरीर में
पानी रुकने की दिक्कत होती है), किडनी की दिक्क़त वाले, हार्मोनल प्रॉब्लम
वालों को गोल-गप्पे न खाने की सलाह दी जाती है.
इसके आलावा
गोल-गप्पे का पानी बनाने में, साफ़ पानी का इस्तेमाल न किया जाए तो पेट से
जुड़ी बीमारियों का ख़तरा ज़्यादा होता है जैसे दस्त, पीलिया, टाइफॉयड.
शियन गेम्स में गुरुवार का दिन भारत
के लिए शानदार रहा. जकार्ता में खेले जा रहे 18वें एशियाई खेलों में भारत
की झोली में दो गोल्ड आए. 1500 मीटर दौड़ में जिनसन जॉनसन ने गोल्ड जीता,
वहीं, महिलाओं की चार गुणा 400 मीटर में भारतीय लड़कियों ने स्वर्णिम दौड़
लगाई.
1978 के बाद भारतीय दल का एशियाई खेलों में ये अब तक सबसे
शानदार प्रदर्शन है. भारत ने कुल मिलाकर जकार्ता एशियाई खेलों में 13
स्वर्ण पदक जीते, इसके अलावा 21 सिल्वर और 25 ब्रॉन्ज मेडल भारत की झोली
में आए.
एशियन गेम्स में 12वें दिन पुरुषों की 1500 मीटर दौड़ में भारत के जिनसन जॉनसन ने गोल्ड मेडल जीत लिया.
जिनसन ने 3 मिनट 44.72 सेकेंड का समय निकाल कर स्वर्ण पदक हासिल किया.
27 साल के जिनसन पहली बार एशियन गेम्स में उतरे थे और पहली बार में ही शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने देश को गोल्ड दिलाया.
भारतीय सेना में कार्यरत जिनसन केरल के रहने वाले हैं.
जिनसन के बाद भारत ने महिलाओं की चार गुणा 400 मीटर रिले स्पर्धा का स्वर्ण पदक भी अपने नाम कर लिया है.
हिमा
दास, पूवम्मा राजू, सरिताबेन गायकवाड़ और विसमाया वेलुवाकोरोथ की टीम ने
तीन मिनट 28.72 सेकेंड का समय निकाल कर भारत को दिन का दूसरा पदक दिलाया.
स्पर्धा
में रजत पदक बहरीन और कांस्य पदक वियतनाम को मिला. बहरीन की टीम ने तीन
मिनट 30.62 सेकेंड का समय निकाला और वियतनाम ने तीन मिनट 33.23 सेकेंड का
समय निकाल कर कांस्य पदक अपने नाम किया. भारत की सीमा पुनिया ने चक्का फेंक में कांस्य पदक
हासिल किया. इसके अलावा महिलाओं की 1500 मीटर दौड़ में चित्रा उन्नीकृष्णन
ने कांस्य पदक पर कब्जा किया.
पुरुषों की 4 गुणा 400 मीटर रिले रेस में मोहम्मद कुन्हु, धारुन अय्यासामी, मोहम्मद अनस और अरोकिया राजीव ने रजत पदक जीता. एथलेटिक्स में अब तक का प्रदर्शन
पिछले सालों के मुकाबले एशियन गेम्स 2018 में भारत के एथलेटिक्स खिलाड़ियों का प्रदर्शन अच्छा रहा है.
एथलेटिक्स में इस साल भारत की झोली में 7 गोल्ड, 10 रजत और 2 कांस्य पदक आए हैं.
सैम करन का बल्ला न चला होता तो
इंग्लैंड की साउथैम्पटन में भारत के ख़िलाफ़ हालत बेहद खस्ता होती. करन ने
78 रनों की पारी खेली और आउट होने वाले आख़िरी अंग्रेज़ बल्लेबाज़ रहे.
इंग्लैंड ने पहली पारी में 76.4 ओवर बल्लेबाज़ी की और 246 रन बनाए.
जवाब
में भारत ने पहले दिन का खेल खत्म होने तक बिना विकेट गंवाए 19 रन बना लिए
हैं. शिखर धवन तीन रन और केएल राहुल 11 रन बनाकर क्रीज पर हैं.
भारत
और इंग्लैंड के बीच पांच टेस्ट मैचों की सिरीज़ का चौथा मुक़ाबला
साउथैम्पटन में खेला जा रहा है. भारत सिरीज़ में इंग्लैंड से 1-2 से पीछे
है.
भारत और इंग्लैंड के बीच चल रही टेस्ट सिरीज़ के चौथे मैच के पहले दिन भारत ने अच्छी शुरुआत की है.
पिछले मैच में शानदार प्रदर्शन करने वाले जसप्रीत बुमराह ने सर्वाधिक
तीन विकेट लिए. ईशांत शर्मा, मोहम्मद शमी और रविचंद्रन अश्विन ने दो-दो और
हार्दिक पंड्या ने एक विकेट झटका.
इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले
बल्लेबाज़ी चुनी लेकिन उन्हें शुरुआती झटके लगते रहे. इंग्लैंड के चार
विकेट 36 रन के योग पर ही गिर गए थे. मैच के तीसरे ही ओवर में जसप्रीत
बुमराह ने कीटन जेनिंग्स को एलबीडब्ल्यू आउट कर दिया. जेनिंग्स अपना खाता
भी नहीं खोल पाए थे.
इसके बाद अनुभवी ईशांत ने इंग्लैंड के कप्तान
जो रूट को एलबीडबल्यू आउट कर मेजबानों को तगड़ा झटका दिया. बुमराह ने
बेरस्टो को विकेट के पीछे ऋषभ पंत के हाथों कैच आउट करवा इंग्लैंड को तीसरा
झटका दिया. इसके बाद हार्दिक पांड्या ने एलिस्टर कुक को विराट कोहली के
हाथों कैच आउट करवा इंग्लैंड का चौथा विकेट झटका.
उसके बाद बेन स्टोक्स और विकेटकीपर बल्लेबाज़ जोस बटलर ने पारी को
संभालने की कोशिश की, लेकिन 69 के योग पर बटलर (21) भी चलते बने. स्टोक्स
भी अपने स्कोर को 23 रन से अधिक नहीं खींच सके.
इंग्लैंड पहली पारी में जिस स्थिति में दिख रहा है उसका श्रेय सैम करन
को जाता है. करन ने पहले मोइन अली के साथ 81 रनों की और फिर ब्रॉड के साथ
भी 50 से ज्यादा रनों की पार्टनरशिप की. मोइन अली ने 40 रन बनाए.
करन
ने भारतीय गेंदबाज़ों का डटकर सामना किया और 136 गेंदों की पारी में 78 रन
बनाए, जिसमें आठ चौके और एक छक्का शामिल है. भारत की ओर से बुमराह को सबसे
ज्यादा 3 विकेट हासिल हुए.